ओणम का त्योहार क्या है? तथा यह क्यों मनाया जाता है? ओणम पर्व के पीछे का महत्व

ओणम का त्योहार क्या है? तथा यह क्यों मनाया जाता है? ओणम पर्व के पीछे का महत्व – नमस्कार दोस्तों कैसे हैं आप सभी? उम्मीद है कि आप सभी स्वस्थ होंगे। दोस्तों मैं एक बार फिर से आप सभी का स्वागत करता हूं हमारे इस बिल्कुल नए आर्टिकल पर। आज के इस आर्टिकल में हम आपको एक बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी देने जा रहे हैं। आज इस आर्टिकल में हम आपको ओणम पर्व के बारे में बताएंगे।

आज इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे ओणम पर्व क्या है? तथा ओणम क्यों मनाया जाता है? साथ में हम आपको आज ओणम पर्व के पीछे का महत्व भी बताएंगे। दोस्तों अगर आप भी इन सभी जानकारियों के बारे में जानना चाहते हैं तो हमारा आज का यह आर्टिकल आखिरी तक पूरा पढ़िए।

दोस्तों पैसे तो दुनिया में अनेक देश हैं पर इन सभी देशों में भारत देश सबसे महान है । इसके पीछे आने कारण है। इसका मुख्य कारण है कि हमारे देश में हर एक धर्म और संप्रदाय के लोग मिलजुल कर रहते हैं। हमारी भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां पर वर्ष के हर दिन कोई न कोई त्यौहार होता रहता है। यह त्यौहार हर धर्म से संबंधित होता है।

उदाहरण के लिए दीपावली का त्यौहार हिंदुओं से संबंधित है। क्रिसमस डे ईसाई से संबंधित है। लोहड़ी पर्व सिख से संबंधित है। माहे रमजान मुस्लिम धर्म से संबंधित है। इन सभी पर्व में सबसे बड़ी बात यह है कि हमारे देश के नागरिक आपस में सभी मतभेद भूलकर इन सभी त्योहारों को एक साथ मनाते हैं।

वैसे तो हमारे देश में अनेक पर्व है किंतु ओणम पर्व का महत्व एक अलग ही है। अगर आप दक्षिण भारत से संबंधित हैं तो हमें पूरा यकीन है कि ओणम पर्व के बारे में आपको जरूर पता होगा, लेकिन दोस्तों ओणम पर्व एक क्षेत्रीय पर्व है और यह संपूर्ण भारत में नहीं मनाया जाता है। इसीलिए बहुत से लोगों को इस पर्व के बारे में जानकारी नहीं होती है। आज इस आर्टिकल में हमने आपको ओणम पर्व के बारे में बताने का फैसला लिया है। आज इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे ओणम पर्व क्या है?

ओणम पर्व क्या है?

आइए दोस्तों आज हम आपको बताते हैं कि ओणम पर्व क्या है?

ओणम पर्व किसानों से संबंधित एक त्यौहार है। यह त्यौहार मलयाली त्योहार के रूप में मनाया जाता है। मलयाली क्षेत्र का यह मुख्य त्योहार है लेकिन आज के समय में इस त्यौहार को हर एक धर्म और संप्रदाय के लोग मिलजुलकर मनाते हैं। जिस दिन केरल में यह त्यौहार होता है उस दिन केरल में राजकीय अवकाश घोषित होता है। आप इस त्यौहार की महत्वता का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि यह त्यौहार आने के 4 दिन पहले ही केरल में छुट्टी घोषित कर दी जाती है और 4 दिन तक यह छुट्टी रहती है।

केरल में यह त्यौहार इतना ज्यादा विशेष है कि इस त्यौहार को 1961 में केरल सरकार ने राष्ट्रीय त्यौहार का दर्जा भी दे दिया है। यह त्यौहार एक-दो दिन नहीं बल्कि 10 दिनों तक मनाया जाता है और हर एक दिन अलग प्रकार से प्रोग्राम का आयोजन होता है। हर जगह पर रंग-बिरंगे कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है जिसमें हर एक धर्म और संप्रदाय के लोग हिस्सा लेते हैं और मिलजुल कर ओणम पर्व सेलिब्रेट करते हैं।

जब से केरल में ओणम का पर्व अधिक धूमधाम से मनाया जाने लगा है तब से केरल में पर्यटन क्षेत्र को भी काफी बढ़ावा मिला है। इस पर्व को देखने के लिए विदेशों से भी लोग यहां पर आते हैं जिससे पर्यटन के क्षेत्र में भी वृद्धि होती है।

ओणम का त्यौहार कब मनाया जाता है?

दोस्तों अगर आप नहीं जानते कि ओणम का पर्व कब मनाया जाता है तो मैं आपको बता दूं कि ओणम का पर्व मलयालम के सोलर कैलेंडर के अनुसार मनाया जाता है। यह पर्व चिंगम महीने में होता है। चिंगम महीना मलयालम कैलेंडर का पहला महीना होता है जो हमारे कैलेंडर के अनुसार अगस्त या सितंबर में होता है।

वर्ष 2020 में ओणम का पर्व 22 अगस्त से शुरू हुआ था और यह 2 सितंबर तक मनाया गया था।

ओणम पर्व क्यों मनाया जाता है?

दोस्तों अभी तक हमने आपको बताया ओणम पर्व क्या है? तथा ओणम पर्व क्यों मनाया जाता है? अब हम आपको बताने जा रहे हैं ओणम पर्व मनाने के पीछे का महत्व । दोस्तों ओणम का त्यौहार कोई नया त्यौहार नहीं है। यह त्यौहार बीते कई दशक से चला आ रहा है।

किंतु पहले के समय में यह त्यौहार इतना धूमधाम से नहीं मनाया जाता था क्योंकि संसाधनों का अभाव था, परंतु आज के समय में यह त्यौहार दोगुना धूमधाम के साथ मनाया जाता है। यह त्यौहार मनाने का एक कारण यह भी है कि इस दिन केरल में चावल की फसल कटकर घर आती है जिस खुशी में भी लोग इस त्योहार को मनाते हैं।

ओणम का त्योहार असुरो के राजा महाबली से जुड़ा हुआ है। यह त्यौहार भगवान विष्णु को समर्पित है और लोगों का ऐसा मानना है कि इस दिन भगवान विष्णु अपने भक्तों से मिलने आते हैं। उन्हीं के स्वागत में इस त्यौहार को मनाया जाता है।

ओणम पर्व में मनाए जाने वाले दिन

अथं

यह ओणम त्यौहार का पहला दिन होता है। लोगों का मानना है कि इस दिन राजा महाबली पाताल से केरल जाने की तैयारी करते है।

चिथिरा

इस दिन फूलों का कालीन (पूक्क्लम) का बनना शुरू होता है।

चोधी

जब पूक्क्लम तैयार हो जाते है तो उसके लगभग 4 से 5 दिन बाद फूलों से अगली लेयर बनना शुरू होती है।

विशाकम

इस दिन अनेक प्रकार की प्रतियोगिता का शुभारम्भ होता है।

अनिज्हम

इस दिन नाव की रेस की तैयारी शुरू की जाती है।

थ्रिकेता

इस दिन से छुट्टियां प्रारंभ हो जाती है।

मूलम

इस दिन मंदिरों में स्पेशल पूजा का आयोजन होता है।

पूरादम

इस दिन महाबली और वामन की प्रतिमा की स्थापना अपने अपने घर में कि जाती है।

उठ्रादोम

इस दिन महाबली राजा का उनके राज्य केरल में प्रवेश होता है।

थिरुवोनम

यह मुख्य त्यौहार होता है ।

ओणम पर्व बनाने का तरीका

आइए दोस्तों अब हम आपको ओणम पर्व मनाने का तरीका बताते हैं। जैसा कि हमने आपको पहले ही बताया है ओनम का पर्व केरल का एक बहुत ही प्रभु का पर्व है। इस पर्व के आने के 10 दिन पहले की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। 10 दिन लगातार अलग-अलग प्रकार के पर्व मनाए जाते हैं। इनमें से विशेष रूप से नौका प्रतियोगिता होती है। जिस दिन सभी लोग अपनी अपनी नौका की प्रतियोगिता करते हैं।

इस प्रकार सभी पर्व मनाने के 10 दिन बाद मुख्य पर्व आता है। इस दिन लोग सुबह जल्दी उठते हैं और सुबह जल्दी उठकर मंदिर जाते हैं जहां पर भगवान विष्णु की पूजा अर्चना की जाती है। कुछ लोग इस दिन व्रत भी रहते हैं और इस तरह ओणम का पर्व संपन्न होता है।

दोस्तों यह आपके लिए छोटी सी जानकारी थी। आज इस आर्टिकल में हमने आपको ओणम पर्व के बारे में बताया। आज इस आर्टिकल में हमने आपको बताया ओणम पर्व क्या है तथा ओणम पर्व कैसे मनाया जाता है। हमें उम्मीद है कि यह जानकारी आपको पसंद आई होगी। दोस्तों अगर आप इसी प्रकार की अन्य जानकारियां पाना चाहते हैं तो हमारा आर्टिकल प्रतिदिन पढ़िए। अपना कीमती समय देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। शुभ दिन

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