होली क्यों मनाई जाती है? क्या होता है लट्ठमार होली? 2021 में होली कब है?

होली हिन्दुओं के प्रसिद्ध त्योहारों में से एक है। यह हिन्दी महीने के फाल्गुन में मनाई जाती है। होली शब्द की उत्पत्ति ‘होला’ शब्द से हुई है जिसका सामान्य अर्थ है: आग में भूनी हुई हरे चने या मटर की फलियाँ। यह त्यौहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है, इसीलिए इसे खुशियों का त्यौहार कहा जाता है। यह रंगों का त्योहार होता है इसीलिए इस दिन लोग एक दूसरे से रंग खेलते हैं। इस दिन लोग समाज में किसी भी ऊंच-नीच के भेदभाव को भूलकर एक दूसरे से गले मिलते हैं और खुशियाँ बांटते हैं। इस दिन सभी घरों में पकवान भी बनाए जाते हैं और अपने करीबियों के साथ बैठकर खाते हैं।

होली क्यों मनाई जाती है? क्या होता है लट्ठमार होली? 2021 में होली कब है?

यह त्यौहार सिक्खों में भी लोकप्रिय है। वे होलिका दहन के दिन गेंहूं की बालियों को आग में डालकर उसको भूनते हैं और उसको अगले दिन खाते हैं। इसीलिए यह त्यौहार खेती-किसानी से भी सम्बंधित है। होली का त्यौहार रंगों का त्योहार कहा जाता है और यह प्रेम और एकजुटता का भी प्रतीक है। यह त्यौहार मुख्य रूप से भारत और नेपाल के लोगों द्वारा मनाया जाता है।

होली क्या है तथा होली क्यों मनाते हैं?

फाल्गुन माह की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को होली मनाई जाती है। इसके अनुसार साल 2021 में 29 मार्च को होली आ त्यौहार पड़ रहा है। इस हिसाब से 28 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा। होलिका दहन बुराई को जलाने का भी प्रतीक है।

होलिका दहन की पौराणिक कहानी

पौराणिक कथाओं के अनुसार हिरण्यकश्यप के पुत्र प्रह्लाद को नारद से शिक्षा-दीक्षा मिली थी। इसीलिए वे भगवान विष्णु को मानते थे और उन्हीं की पूजा करते थे। चूँकि हिरण्यकश्यप एक असुर था इसीलिए उसको प्रह्लाद का भगवान विष्णु की पूजा करना पसंद नहीं था। उसने प्रह्लाद को हर तह से समझाया लेकिन वे नहीं माने। इस पर हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को अपनी बेटी होलिका के गोंद में बैठाकर जला दिया।

होलिका को वरदान मिला था कि कि आग उसको नहीं जला सकता है। लेकिन प्रह्लाद की ईश्वर को लेकर आस्था के कारण उस आग में होलिका जल गई लेकिन प्रह्लाद को कुछ नहीं हुआ। इसी के बाद से होलिका दहन का आरंभ हुआ। हिरण्यकश्यप खुद को भगवान से अधिक शक्तिशाली मानता था क्योंकि उसे भगवान ब्रह्मा द्वारा वरदान मिला था कि वह न तो सुबह मर सकता है न ही शाम को, न ही घर के बाहर मर सकता है न ही अंदर, न पृथ्वी पर मर सकता है ना ही आकाश में, न ही उसे नर मार सकता है न ही पशु। इस पर भगवान विष्णु ने उसके अत्याचार को समाप्त करने के लिए नरसिंह का अवतार लेकर उसका वध किया था।

लट्ठमार होली क्या है ?

लट्ठमार होली विशेष रूप से उत्तर प्रदेश राज्य के मथुरा जिले में स्थित बरसाना और नंद गाँव में मनाई जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार जब भगवान श्री कृष्ण नंद गाँव से बरसाना राधा से मिलने के लिए जाते हैं तो वहाँ राधा और गोपियाँ उन्हें लाठियों से मारकर भगाने लगती हैं। तब से वहाँ पर हर साल लठ्ठमार होली मनाया जाता है। आज भी नंद गाँव के लोग बरसाना जाते हैं और वहाँ की महिलाएँ उन्हें लाठियां मारकर भगाती हैं। इसके अलावा भाभी और देवर के बीच भी लट्ठमार होली मनाई जाती है। इसमें भाभियाँ अपने देवर को लाठियों से मारती हैं। लट्ठमार होली का आनंद लेने के लिए देश के कई कोनों से और विदेशों से लोग मथुरा जाते हैं। होली के एक सप्ताह बाद तक यहाँ के अलग-अलग जगहों पर लट्ठमार होली का आयोजन होता है और रंगों की होली भी खेली जाती है।

होली का महत्व

  • हिन्दुओं के लिए होली का बहुत ही महत्व है। यह बुराई पर अच्छाई की जीत और बुराई के दहन के रूप में जाना जाता है।
  • इस त्यौहार के दिन लोग अपना आपसी मतभेद भुलाकर एक दूसरे से मिलते हैं और उन्हें गुलाल लगाते हैं।
  • एक धारणा है कि इस दिन लाल रंग लगाकर एक दूसरे से मतभेद समाप्त किया जाता है।
  • होली का त्यौहार रंगों का त्यौहार है और रंग आपसी सौहार्द का प्रतीक है। इसीलिए इस दिन को बड़े ही खुशी के साथ मनाया जाता है।
  • होलिका दहन को लेकर लोगों की सोच है कि इस दिन लोग अपने मन के अंदर के नकारात्मक विचार को भी जला कर देते हैं और एक अच्छी सोच के साथ नई शुरूआत करते हैं।

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