भाई दूज पर्व क्या है तथा भाई दूज पर्व क्यों मनाते हैं?

भाई दूज पर्व क्या है तथा भाई दूज पर्व क्यों मनाते हैं? भाई दूज पर्व के पीछे का इतिहास एवं महत्व – नमस्कार दोस्तों कैसे हैं आप सभी? उम्मीद है कि आप सभी स्वस्थ होंगे। दोस्तों मै एक बार आप सभी का दिल से स्वागत करता हूं हमारे इस बिल्कुल नया आर्टिकल पर। आज हम आपको बताने जा रहे हैं भाई दूज पर्व के बारे में ।आज के इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे भाई दूज का पर्व क्या है तथा भाई दूज का पर्व क्यों मनाया जाता है? तो दोस्तों अगर आप भी भाई दूज पर्व के पीछे की इतिहास को समझना चाहते हैं तथा इस त्यौहार के बारे में हर एक बात जानना चाहते हैं आज आप बिल्कुल सही आर्टिकल पर आए हैं।

अगर आप भी भारत देश का नागरिक है तो आपको खुद के ऊपर गर्व होना चाहिए क्योंकि हमारे देश में आपको अनेक त्यौहार देखने को मिलेंगे । पूरे वर्ष में छोटे और बड़े सारे त्योहारों को मिलाकर कम से कम 100 से भी ज्यादा त्यौहार मनाए जाते हैं । सबसे बड़ी बात यह है कि यह त्यौहार किसी न किसी महत्व को प्रदर्शित करते हैं। हर त्यौहार के पीछे एक अलग ही इतिहास तथा एक अलग ही महत्व होता है और हर एक त्यौहार किसी न किसी को समर्पित होता है।

अगर आप दीपावली का उदाहरण ले तो दीपावली मां लक्ष्मी को समर्पित होती है। बसंत पंचमी मां सरस्वती को समर्पित होती है, गणेश विसर्जन भगवान गणेश को समर्पित होता है, शिव रात्रि भगवान शिव को समर्पित होती है इसी प्रकार हमारे देश में एक भाई दूज का त्यौहार भी बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है और सबसे बड़ी बात यह कि यह त्यौहार भाई और बहन को समर्पित होता है।

दोस्तों अगर आप भारत देश के नागरिक है तो निसंदेह भाई दूज का त्यौहार आपके घर में भी मनाया जाता होगा और अगर आपके घर में भी आपकी कोई बहन है या फिर आपके परिवार में कोई बहन है तो वह भाई दूज के दिन आपके साथ इस पर्व को इंजॉय करती होगी । लेकिन दोस्तों जैसा कि आप सभी को पता है हम अपने पूर्वजों के पद चिन्हों पर चलते चले आ रहे हैं जैसा हमारे पूर्वज करते थे वैसा ही हम करते हैं ।

हमने कभी यह जानने की कोशिश ही नहीं की कि आखिर भाई दूज का पर्व क्यों मनाया जाता है? और भाई दूज के पर्व के पीछे का इतिहास क्या है? इसीलिए आज हमने सोचा कि क्यों ना आप को भाई दूज पर्व का इतिहास बताया जाए और भाई दूज से जुड़ी कुछ रोचक जानकारी दी जाए।

भाई दूज क्या है ?

भाई दूज का त्यौहार हिंदू धर्म का एक बहुत ही प्रमुख त्योहार है। यह त्यौहार बहुत ही पवित्र होता है। भाई दूज का त्यौहार बहन और भाई को समर्पित है। इस दिन भाई-बहन के बीच अटूट बंधन का एक पुनर्जन्म होता है।

भाई दूज के त्योहार को प्रतिवर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को बड़े ही धूमधाम के साथ आयोजित किया जाता है, भाई दूज का त्योहार दीपावली के तीसरे दिन होता है और इस दिन हर बहन अपने भाई को तिलक करती है और उसकी आरती उतारती हैं, उसको मिठाई खिलाती है और भगवान से प्रार्थना करती है कि उसके भाई कीर्ति यश को प्राप्त करें तथा उसकी उम्र लंबी हो । बदले में भाई अपनी बहन को उपहार देता है और उसको वचन देता है कि वह भाई मुसीबत में उसके साथ खड़ा रहेगा ।

भाई दूज का त्यौहार रक्षाबंधन की तरह ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है और इस दिन हर भाई की बहन भाई से मिलने आती है अगर आप की भी कोई बहन है तो आपको जरूर इस त्यौहार का महत्व पता होगा।

भाई दूज जी त्योहार के पीछे कहानी

दोस्तों जैसा कि आपने आपको पहले ही बताया था हमारे देश में जितने भी त्योहार होते हैं उन सभी के पीछे कोई न कोई पौराणिक कहानी जरूर होती है ऐसी ही एक कहानी भाई दूज के त्यौहार को लेकर भी है। अगर आप यह कहानी कभी नहीं सुने हैं तो आइए हम आपको यह कहानी सुनाते हैं।

पुराणों के अनुसार बहुत समय पहले की बात है यमुना और यमराज नाम के दो भाई बहन थे, जमुना और यमराज का जन्म छाया की कोख से हुआ था जो कि नारायण की पत्नी थी।

हर भाई बहन की तरह जमुना और यमराज के बीच भी अटूट प्रेम था और यमुना तथा यमराज आपस में बहुत स्नेह करते थे। यमुना ने कई बार अपने भाई यमराज को अपने घर खाने पर निमंत्रण दिया था लेकिन यमराज को हर बार कोई न कोई आवश्यक काम पड़ जाता था जिस वजह से वह अपनी बहन यमुना के घर खाने पर नहीं जा पाता था।

अंत में जब कई बार यमुना ने यमराज को अपने यहां खाने के लिए बुलाया पर यमराज नहीं आए तो हार कर यमुना ने यमराज से वचन लिया और वचन में उन्होंने मांगा कि वह कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितया को उनके घर खाना खाने जरूर आएंगे । इस पर यमराज ने सोचा कि लोग मुझे बहुत बुरा समझते हैं क्योंकि मैं मृत्यु का देवता हूं फिर भी मेरी बहन मुझसे इतना प्रेम करती है कि वह मेरे बार-बार मना करने के बाद भी मुझे खाने पर आमंत्रित कर रही है

यमराज अपनी बहन को दुखी नहीं करना चाहते थे इसलिए वह अपनी बहन को दिए गए वादे के अनुसार उसके घर कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को उसके घर आने पर पहुंचते हैं ।जैसे ही जमुना अपने भाई को देखती है वह बहुत ही खुश हो जाती है तथा यमराज का आदर सत्कार करती है। जमुना यमराज के आदर सत्कार में कोई भी कमी नहीं रखती है । यमुना अपने भाई यमराज को तिलक करती है तथा तिलक करने के बाद भी उसको खाना खिलाती है । जमुना यमराज को अनेक प्रकार के व्यंजन खिलाती है

जमुना द्वारा किए गए इतने आदर सत्कार के बाद यमराज उससे बहुत ही प्रसन्न होते हैं और वह अपनी बहन यमुना से कहते हैं कि मुझसे कोई एक वर मांगो। तब जमुना यमराज से वर मानती है कि यह मेरे भाई आज के दिन जो भी बहन अपने भाई को तिलक करेगी और उसे मिठाई खिलाएगी उस बहन के भाई को कभी भी यमराज का भय नहीं रहेगा। इसके बाद यमराज तथास्तु कहकर वरदान दे देते हैं । इस दिन के बाद से ऐसी मान्यता है कि जो भी बहन अपने भाई के तिलक करती है वह सब बहन के भाई के ऊपर यमराज कभी भी अपनी गलत दृष्टि नहीं डालते हैं ।

भाई दूज कब मनाया जाता है?

भाई दूज का पर्व दीपावली के ठीक 1 दिन बाद कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को मनाया जाता है। इस दिन सारी बहनें अपने भाई को तिलक करती हैं तथा उन्हें मिष्ठान खिलाती हैं।

भाई दूज का त्यौहार कैसे मनाया जाना चाहिए?

दोस्तों हमारे देश में हर एक त्योहार मनाने का अपना एक अलग तरीका होता है । भाई दूज का त्यौहार मनाने का भी एक तरीका है। भाई दूज के त्यौहार के दिन सभी भाइयों को उनकी बहन के यहां जाना पड़ता है और प्रचलन है कि भाई अपनी बहन के यहां बिना नहाए जाते हैं और अपनी बहन के यहां स्नान करते हैं। इसके बाद बहन अपने भाई को तिलक करती है तथा उनको मिष्ठान खिलाती है और मिष्ठान खिलाने के बाद में दोनों साथ में खाना खाते हैं।

निष्कर्ष

दोस्तों यह आज आपके लिए छोटी सी जानकारी थी। आज हमने आपको भाई दूज के बारे में बताया। हमें उम्मीद है कि यह जानकारी आपको पसंद आई होगी। दोस्तों अगर आप इसी प्रकार की अन्य जानकारी पाना चाहते हैं तो हमारा आर्टिकल प्रतिदिन पढ़िए । हम अपने इस आर्टिकल पर आपके लिए नए नए विषय पर जानकारी लेकर आते रहते हैं। अपना कीमती समय देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। शुभ दिन

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