होली क्या है तथा होली क्यों मनाते हैं?
By: Date: August 30, 2020 Categories: Holi
होली क्या है तथा होली क्यों मनाते हैं?

होली क्या है तथा होली क्यों मनाते हैं? – नमस्कार दोस्तों कैसे हैं आप सभी? हमें उम्मीद है कि आप सभी स्वस्थ होंगे। दोस्तों मैं एक बार फिर से आप सभी का स्वागत करता हूं हमारे इस बिल्कुल नए आर्टिकल पर। आज के इस आर्टिकल में हम आपको बताने जा रहे हैं कि होली क्या है? तथा साथ में आपको यह भी बताएंगे कि होली क्यों मनाते हैं? तो दोस्तों अगर आप भी होली त्यौहार के पीछे छुपे पौराणिक इतिहास को जानना चाहते हैं और होली के बारे में जानकारी लेना चाहते हैं तो हमारा आज का यह आर्टिकल पूरा आखरी तक जरूर पढ़िए।

दोस्तों अगर आप भारत देश के नागरिक है तो निसंदेह आप ने होली का नाम जरूर सुना होगा । होली का नाम आते ही हम सभी के चेहरे खिल उठते हैं तथा दिल में एक अलग ही खुशी उत्पन्न हो जाती है। होली त्यौहार ही कुछ ऐसा है , फिर चाहे वह बच्चे हों या बड़े हो कोई भी इस त्यौहार से परे नहीं रहता।

होली का त्यौहार आने के कुछ दिन पहले से ही हम सभी घर की साफ सफाई में जुट जाते हैं , कपड़े खरीदने लगते हैं तथा पकवान बनाने की तैयारियां करने लगते हैं और होली वाले दिन हम सभी के जीवन का एक प्रशन्नमय दिन होता है जिस दिन को हम कभी भूलना नहीं चाहते।

होली का त्यौहार बीते सैकड़ों वर्षो से चला आ रहा है और हमारे पूर्वज भी इस त्यौहार को बड़ी ही धूमधाम से मनाते थे। पर दोस्तों यहां पर सोचने वाली बात यह है कि हमारे पूर्वजों को होली त्यौहार के पीछे के पौराणिक इतिहास के बारे में जानकारी थी किंतु आज की जो नई पीढ़ी आ रही है उसको होली त्यौहार के पीछे छुपे पौराणिक इतिहास की जानकारी नहीं है ।

आज के जो नए बच्चे हैं वह सिर्फ अपने मां-बाप को होली मनाते देखते हैं इसीलिए वह भी होली मनाने लगते हैं लेकिन उन्हें यह नहीं पता होता है कि आखिर होली क्या है? और होली मनाई क्यों जाती है? दोस्तों अगर आप भी होली त्यौहार के पीछे छुपे इतिहास को जानना चाहते हैं और होली के बारे में रोचक जानकारियां पाना चाहते हैं तो आज आप बिल्कुल सही आर्टिकल पर आए हैं।

होली क्या है?

आइए दोस्तों अब हम आपका ज्यादा समय बर्बाद ना करते हुए आपको बताते हैं कि होली क्या है?

होली हिंदुओं का एक बहुत ही प्रमुख त्यौहार है लेकिन आज के समय में यह ना सिर्फ हिंदुओं का बल्कि हर एक समुदाय का लोकप्रिय त्यौहार बनता चला जा रहा है । होली का त्यौहार मार्च महीने में मनाया जाता है । होली के त्यौहार के साथ ही हमारे देश में सर्दियों की समाप्ति होती है तथा ग्रीष्म ऋतु का प्रारंभ होता है।

हिंदी कैलेंडर के अनुसार यह त्यौहार फागुन महीने में होता है इसलिए इस त्यौहार को फागुन नाम से भी बहुत से लोग जानते हैं। होली त्यौहार मनाने का तरीका हर किसी का अलग अलग होता है। भारत के अनेक हिस्सों में होली का त्यौहार मनाया जाता है किंतु हर एक हिस्से में होली त्यौहार मनाने का तरीका अलग होता है कुछ राज्यों में किसान अपनी फसल घर लाने की खुशी में होली मनाते हैं तो कुछ स्थानों पर सर्दी ऋतु समाप्त होने की खुशी में होली मनाई जाती है।

होली के मुख्य त्योहार से 1 दिन पहले छोटी होली जिसे हम होलिका दहन भी कहते हैं मनाया जाता है । इस में लकड़ियों के एक बहुत बड़े ढेर को सजाया जाता है और रात में उसको जलाया जाता है, जिसकी सभी लोग पूजा अर्चना करते हैं और उसकी परिक्रमा करते हैं। होलिका दहन के दूसरे दिन होली का मुख्य त्यौहार होता है जिस त्योहार में लोग अपने बड़े बुजुर्गों को रंग लगाकर उनसे आशीर्वाद लेते हैं तथा आपस में सारे गिले-शिकवे भूलकर एक दूसरे को गुलाल लगाते हैं और एक दूसरे से भाईचारा बढ़ाते हैं।

होली का त्यौहार समाप्त होने के दूसरे दिन ही भाई दूज का त्यौहार होता है । इस भाई दूज के त्यौहार में सभी बहन अपने भाई को तिलक लगाती हैं और उन्हें पकवान खिलाते हैं, बदले में भाई भी अपनी बहनों को रक्षा का वचन देते हैं और उन्हें उपहार के रूप में पैसे या फिर गिफ्ट देते हैं।

होली का त्यौहार होने के 7 दिन बाद रंग पंचमी या फिर गंगा मेला का त्यौहार होता है । गंगा मेला के त्यौहार में भी होली की तरह ही रंग गुलाल लगाया जाता है और पकवान बनाए जाते हैं । कई कई स्थानों पर होली से लेकर रंग पंचमी आने गंगा मेला तक लगातार छुट्टियां घोषित की जाती हैं।

होली के त्योहार से जुड़ी पौराणिक कहानी

दोस्तों अब हम आपको उस कहानी के बारे में बताते हैं जिसका आप सभी को इंतजार था । जैसा कि हमने आपको बताया है हर एक त्यौहार के पीछे एक पौराणिक इतिहास होता है होली के पीछे भी एक पौराणिक इतिहास है ।

दोस्तों ऐसा माना जाता है कि प्राचीन काल में एक बहुत ही भयंकर असुर था जिससे जिसका नाम हिरण्यकश्यप था और इस असुर को स्वयं भगवान ब्रह्मा ने आशीर्वाद दिया था कि इस असुर को कोई भी मार नहीं सकता है।

इस अशुर के पास ऐसी शक्तियां थी कि हिरण्यकश्यप को ना कोई धरती पर मार सकता था, ना कोई आसमान में मार सकता था, ना कोई अस्त्र से मार सकता था , ना कोई सत्र से मार सकता था ना, कोई जल में मार सकता था,ना कोई वायु में मार सकता था । इन सभी शक्तियों के कारण हिरण्यकश्यप बहुत ही अहंकार करने लगा था और वह खुद को भगवान समझने लगा था।

उस समय कुल देवता भगवान विष्णु थे और वहां के सभी लोग भगवान विष्णु की पूजा करते थे लेकिन हिरण कश्यप अहंकार में चूर था इसीलिए वह सबसे कहने लगा कि मैं भगवान हूं और सभी लोग मेरी पूजा करें और जो भी हिरणकश्यप की पूजा नहीं करता था हिरणकश्यप उसको मार देता था। धीरे-धीरे करके हिरण्यकश्यप का खौफ पूरे राज्य में व्याप्त हो गया और सभी लोग हिरण्यकश्यप की पूजा करने लगे।

हिरण्यकश्यप का एक पुत्र था जिसका नाम प्रहलाद था। उसने हिरणकश्यप की बात नहीं मानी और वह भगवान विष्णु की पूजा करता रहा। प्रहलाद भगवान विष्णु का अनन्य भक्त था और वो हिरणकश्यप के बार बार चेतावनी देने पर भी उसने भगवान विष्णु की भक्ति नहीं छोड़ी। अंत में हिरण्यकश्यप ने उसकी मौत की योजना बनाई।

हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद की मृत्यु के लिए होलिका को आमंत्रित किया। होलिका हिरण्यकश्यप की बहन थी और होलिका को भी भगवान विष्णु ने वरदान दिया था कि वह कभी आग में नहीं जलेगी। होलिका के पास एक चमत्कारी चुन्नी थी , जिस चुनरी को पहनकर वह आग में कभी नहीं जल सकती थी।

योजना के अनुसार हिरणकश्यप ने प्रहलाद को होलिका के साथ अग्नि में बैठा दिया और अग्नि प्रज्वलित कर दिया, पर भगवान की दया से उसी समय तेज हवा चलने लगी और होलिका के सर की चुनरी प्रहलाद के ऊपर आ गिरी। जिस वजह से प्रहलाद अग्नि में जलने से बच गया और होलिका की अग्नि में जलकर मृत्यु हो गई । इस प्रकार भगवान ने अपने भक्त और साधक प्रहलाद की जान बचाई।

इस घटना के बाद से ही होलिका की मृत्यु पर तथा प्रहलाद की जीत की खुशी में होलिका का त्यौहार मनाया जाता है और जिस प्रकार होलिका की अग्नि में जलकर अंत हुआ था उसी प्रकार होली के एक दिन पहले होलिका दहन का आयोजन होता है जिसमें लकड़ियों के बहुत बड़े गड्ढे में आग लगाई जाती है।

सही तरह से होली कैसे मनाए?

दोस्तों जैसा कि हमने आपको बताया होली के त्यौहार में लोग बहुत ही इंजॉय करते हैं और एक दूसरे को रंग लगाते हैं। होली के एक दिन बाद परेवा नाम का एक त्यौहार होता है जिसमें लोग जुआ खेलते हैं तथा शराब पीते हैं । दोस्तों यह हमारा इतिहास नहीं था लेकिन आज के समय में लोगों ने जुआ खेलना तथा शराब पीने को भी होली से जोड़ दिया है ।

बहुत से लोग होली के त्यौहार में गुलाल के अंदर खतरनाक केमिकल से बने कलर मिला लेते हैं और उन रंगों को सबके चेहरे पर लगाते है , जिस वजह से हमारी स्किन खराब हो जाती है। दोस्तों मैं आप सभी से अनुरोध करना चाहता हूं कि अगर आप सही तरह से होली मनाना चाहते हैं तो आप सिर्फ प्राकृतिक रंगों का ही इस्तेमाल करें और बाजार में मिलने वाले किसी भी केमिकल से बने खतरनाक कलर का इस्तेमाल ना करें क्योंकि यह हमारी त्वचा को बहुत ही नुकसान पहुंचाते हैं साथ ही साथ इस त्यौहार में नशा मांस का सेवन भी ना करें और हंसी खुशी अपने परिवार के साथ होली का त्यौहार इंजॉय करें

निष्कर्ष

दोस्त यह आप के लिए छोटी सी जानकारी थी, जिसमें आज हमने आपको बताया कि होली त्यौहार क्या है? तथा होली का त्यौहार क्यों मनाते हैं? हमें उम्मीद है कि यह जानकारी आपको पसंद आई होगी ।दोस्तों आज की यह जानकारी यहीं पर समाप्त होती है, अगर आप इसी प्रकार की अन्य जानकारियां पाना चाहते हैं तो हमारा आर्टिकल प्रतिदिन पढ़िए। हम अपने इस आर्टिकल पर आप सभी के लिए अनेक विषय में नई नई जानकारी लेकर आते रहते हैं । अपना कीमती समय देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद

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