जन्माष्टमी क्यों और कब मनाई जाती है?

जन्माष्टमी क्यों मनाई जाती है और कब मनाई जाती है? – नमस्कार दोस्तों नमस्कार दोस्तों कैसे हैं आप सभी हमें उम्मीद है कि आप सभी स्वस्थ होंगे दोस्तों आज मैं हर बार की तरह एक बार फिर से आप सभी के सामने उपस्थित हूं एक बहुत ही शानदार और महत्वपूर्ण जानकारी को लेकर। आज के इस आर्टिकल में हम आपको बताने जा रहे हैं जन्माष्टमी पर्व के बारे में ।

आज इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे जन्माष्टमी पर्व क्यों मनाया जाता है और जन्माष्टमी पर्व के पीछे का इतिहास क्या है? तो दोस्तों अगर आप भी इन सभी जानकारियों के बारे में जानना चाहते हैं तो हमारा आज का यह आर्टिकल आखरी तक जरूर पढ़िए।

दोस्तों जन्माष्टमी के त्यौहार से कौन वाकिफ नहीं होगा यह हमारे हिंदू धर्म के प्रसिद्ध त्योहारों में से एक त्यौहार है। इस त्यौहार को लोग बहुत जोर शोर से मनाते हैं। इस दिन भगवान श्री कृष्ण का जन्मदिन होता है देश के अलग-अलग हिस्सों राज्यों में अलग-अलग अंदाज से भक्ति संगीत से भगवान श्री कृष्ण को जन्मदिन के उपलक्ष्य में शुभकामनाएं दी जाती हैं।

पृथ्वी में उन्होंने एक साधारण मानव की तरह जन्म लिया और पृथ्वी से दुष्टों का संहार किया ।कृष्ण भगवान को बाल गोपाल गोविंदा, कान्हा, गोपाल, ग्वाला जैसे लगभग 108 नामों से पुकारा जाता है इसलिए हजारों वर्षों से कृष्ण जन्माष्टमी के पावन उत्सव को श्रद्धालु अपनी पूरी श्रद्धा के साथ मनाते हैं।

इतने बड़े त्यौहार होने के कारण हमें जन्माष्टमी कब मनाई जाती है तथा जन्माष्टमी का महत्व क्या है और जन्माष्टमी की कहानी एवं जन्माष्टमी मनाने की वजह आदि की जानकारी नहीं है जबकि यह बहुत ही गलत है हमें इस बारे में जानकारी होनी चाहिए । श्री कृष्ण की भक्ति करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को इन सभी महत्वपूर्ण जानकारियां अवश्य होनी चाहिए तो तो आइए दोस्तों शुरू करते हैं

जन्माष्टमी क्या है ?

जन्माष्टमी का त्यौहार बहुत ही अद्भुत तरह का त्यौहार होता है । प्रत्येक हिंदू इस विशेष दिन का बेसब्री से इंतजार करते हैं । इस दिन भगवान श्री कृष्ण को भक्ति भाव से प्रसन्न करने पर संतान सुख समृद्धि एवं अधिक उम्र प्राप्त होती है । कृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व को श्रीकृष्ण जयंती के रूप में भी मनाया जाता है।

इस त्यौहार में यानी श्री कृष्ण जन्माष्टमी में लोग उपवास रहते हैं तथा श्री कृष्ण को प्रसन्न करने के लिए मंदिरों में तरह-तरह की सजावट तथा जगराता आदि का आयोजन करते हैं। कई स्थानों पर श्री कृष्ण रासलीला का आयोजन भी किया जाता है जिसमें लोग भारी मात्रा में पहुंचकर उस का आनंद उठाते हैं।

जन्माष्टमी कब मनाई जाती है?

दोस्तों इस अद्भुत त्यौहार की शुरुआत भगवान श्री कृष्ण के जन्म दिन से होती है । हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष के आठवें दिन प्रतिवर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है।

जन्माष्टमी क्यों मनाया जाती है?

हिंदू शास्त्रों के अनुसार श्री हरि विष्णु के आठवें अवतार प्रभु श्री कृष्ण सृष्टि के पालन करता कहे जाने वाले भगवान के जन्मदिन के शुभ अवसर पर इस दिन को जन्माष्टमी के रूप में मनाई जाती है।

भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि में मथुरा नामक नगरी जो कि उत्तर प्रदेश में स्थित है। श्री कृष्ण भगवान ने पृथ्वी पर अपना अवतार लिया। उस समय के मथुरा नरेश अत्याचारी कंस के प्रहार से प्रजा बहुत प्रताड़ित थी। प्रभु ने दुखियों के रक्षक भगवान श्रीकृष्ण स्वयं इस दिन पृथ्वी पर अवतरित हुए तथा वयस्क होने के पश्चात उन्होंने मथुरा नरेश कंश जो कि उनके मामा भी थे उनका वध कर दिया।

जन्माष्टमी कैसे मनाई जाती है?

दोस्तों जन्माष्टमी यह त्यौहार हमारे लिए बहुत खुशियों का त्यौहार होता है । इस दिन होने वाली चहल पर पूरे भारत में देखी जा सकती है । यह त्यौहार पूरा भारत मिलकर मनाता है इसके साथ विदेशों में रहने वाले भारतीय भी वहां पर जन्माष्टमी के त्योहारों को बहुत धूमधाम से मनाते हैं।

जन्माष्टमी का त्योहार मथुरा में देखने लायक होता है वहां पर विदेशों से भी इस त्यौहार को देखने के लिए पर्यटक आते हैं। इस त्यौहार में लोग अपने घरों को मंदिरों को बहुत सजाते हैं तथा भगवान श्री कृष्ण के भजन और गानों को बजा कर खुशियों में झूमते हैं ।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी में भक्तों के द्वारा उपवास रखा जाता है । लड्डू गोपाल की मूर्ति को झूला झुलाया जाता है भजन कीर्तन किए जाते हैं इसके साथ अनेक स्थानों पर युवाओं में दही हांडी तोड़ने की प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जाता है ।

भगवान श्री कृष्ण की नगरी मथुरा में दूर-दूर से श्रद्धालु भगवान श्री कृष्ण के दर्शन करने भक्ति भाव से आते हैं । इस दिन पूरी मथुरा नगरी बिल्कुल अद्भुत तरीके सजी होती है । भगवान श्री कृष्ण के पर्व की चमक दूर से ही देखी जा सकती है लोग अपने घरों तथा मंदिरों को फूल मालाओं से सजाते हैं तथा रात में मंदिरों में लाइटिंग की व्यवस्था करते हैं।

दही हांडी महोत्सव

दोस्तों हम सभी ने कभी ना कभी टीवी या फिर अन्य नाटक के माध्यमों से श्री कृष्ण का बचपन देखा होगा । भगवान श्री कृष्ण अपने बाल कला से लोगों को प्रभावित करते थे। वह अपने वालों काल से ही बहुत शरारती एवं नटखट थे। भगवान श्री कृष्ण को माखन खाना बहुत अच्छा लगता था जिसके लिए वह एक दूसरे की मटकी चुराकर या फोड़कर माखन खाया करते थे । भगवान श्री कृष्ण की अद्भुत लीला को उनके जन्म उत्सव पर दोबारा राजा जाता है ।

जन्माष्टमी की पहचान बन चुका दही हांडी या मटकी फोड़ने की रस्म देश के कई भागों में आयोजित की जाती है और इस अद्भुत दृश्य को देखने से श्री कृष्ण की बचपन की यादें ताजा हो जाते हैं और काफी संख्या में लोग एकत्रित होकर दही हांडी तोड़ने वाले लोगों का उत्साहवर्धन करते हैं।

जन्माष्टमी की कहानी

पुराणों एवं मान्यताओं के अनुसार भगवान श्री कृष्ण ने देवकी एवं वासुदेव के आठवें पुत्र के रूप में जन्म लिया और जन्म के समय एक आकाशवाणी हुई कि वासुदेव का यह आठवां पुत्र कंस का वध करेगा जो आगे जाकर भगवान श्री कृष्ण ने अत्याचारी कंस का वध किया और प्रजा को अत्याचारी कंस के अत्याचार से मुक्त कराया

कंस एक बहुत ही क्रूर एवं अत्याचारी किस्म का राजा था जो कि देवकी का भाई और श्री कृष्ण का मामा था। कंस निर्दोष लोगों की हत्या कर देता था तथा उसने अपनी बहन देवकी तथा उनके पति वासुदेव को बेवजह कालकोठरी में डाल दिया था। श्री कृष्ण भगवान का जन्म काल कोठरी में ही हुआ था।

कंस इतना क्रूर था कि उसने अपनी बहन देवकी की 7 संतानों को पहले ही मर चुका था । फिर देवकी के गर्भ से भगवान श्री कृष्ण ने इस पृथ्वी में आठवें पुत्र के रूप में अवतार लिया और क्रूर कंस का अंत किया।

भगवान श्री कृष्ण के जन्म दिवस के रात आकाश में घनघोर वर्षा होने लगी चारों तरफ बहुत अंधेरा छा गया बहुत तेज तूफान आने लगा श्री कृष्ण भगवान के जन्म के पश्चात कंस से बचाने के लिए वासुदेव ने सिर पर टोकरी रखकर उसमें भगवान श्रीकृष्ण को लिटा कर यमुना नदी की उफनती लहरों के बीच अपने मित्र नंद के यहां पहुंचा आए और श्रीकृष्ण वहां पर माता यशोदा के लाल यशोदा नंदन के नाम से जाने जाने लगे।

देवकी के पुत्र श्री कृष्ण को माता यशोदा ने पालन पोषण किया इसीलिए कहा जाता है कि भगवान श्री कृष्ण बहू की भाग्यशाली थे जिनकी दो माताएं थी । एक माता देवकी एक माता यशोदा बचपन से ही कृष्ण भगवान कंस के द्वारा भेजे गए असुरों का संहार करते रहे हैं तथा कंश के द्वारा प्रजा को कष्ट देने के सभी प्रयासों को उपल करते रहें और फिर अंत में 1 दिन कंस का वध करके मथुरा को उसके अत्याचारों से मुक्त करा दिया ।

जन्माष्टमी का महत्व

जन्माष्टमी हिंदुओं का बहुत प्रमुख त्यौहार है । जिस तरीके हम ही होली दीपावली मनाते हैं उसी प्रकार हम जन्माष्टमी भी बहुत धूमधाम से मनाते हैं । जन्माष्टमी का पर्व पूरे देश में देखने लायक होता है. यह त्यौहार बहुत ही हर्ष और उल्लास के साथ मनाते हैं . लोग इस दिन व्रत रहते हैं तथा भगवान श्रीकृष्ण से अपनी मनोकामना को पूर्ण करने की कामना करते हैं।

निष्कर्ष

दोस्तों आज की जानकारी यहीं पर समाप्त होती है। आज इस आर्टिकल में हमने आपको जन्माष्टमी पर्व के बारे में बताया । आज इस आर्टिकल में हमने आपको बताया कि जन्माष्टमी का पर्व क्या है? जन्माष्टमी का पर्व कब मनाते हैं तथा जन्माष्टमी पर्व के पीछे की पौराणिक महत्व क्या है? हमें उम्मीद है कि यह जानकारी आपको पसंद आई होगी। दोस्तों अगर आप इसी प्रकार की अन्य जानकारियां पढ़ना चाहतेमैं तो हमारा आर्टिकल प्रतिदिन पढ़िए क्योंकि हम आपके लिए अनेक विषयों पर नई नई जानकारी लेकर आते रहते हैं। अपना कीमती समय देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।

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