नवरात्रि क्यों मनाई जाती है? नवरात्रि कब मनाते हैं तथा नवरात्रि का महत्व क्या होता है?

नवरात्रि क्यों मनाई जाती है? – नमस्कार दोस्तों कैसे हैं आप सभी? उम्मीद है कि आप सभी स्वस्थ होंगे दोस्तों आज हम आपके सामने फिर से उपस्थित हैं एक बिल्कुल नई जानकारी के साथ। आज इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि नवरात्रि क्या है तथा नवरात्रि क्यों मनाई जाती है।

दोस्तों आप नवरात्रि के बारे में तो जानते ही होंगे और यह भी जानते होंगे कि इसे क्यों मनाते हैं? यदि आपको इस विषय में जानकारी नहीं है तो यह पोस्ट आपके लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। नवरात्रि एक संस्कृत शब्द है। नवरात्रि एक हिंदू त्यौहार है।

यह हिंदू लोगों के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण पर्व होता है। नवरात्रि को तो केवल नवरात्रि 9 रात्रियों का समूह ही कहते हैं लेकिन यह त्यौहार 10 दिन तक मनाया जाता है और दशमी दिन दशहरा मना कर त्यौहार को समाप्त किया जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार नवरात्रि वर्ष में चार बार मनाई जाती है जोकि पौष, चैत्र, शरद एवं आषाढ़ माह में आती है।

जिनमें से मुख्य रूप में चैत्र और शरद में आने वाली नवरात्रि को प्रमुख माना गया है। नवरात्रि का त्यौहार पूरे देश में बहुत ही हर्षोल्लास एवं धूमधाम के से मनाया जाता है। यह त्यौहार पूरा देश एक साथ मनाता है।

नवरात्रि क्या है ?

नवरात्रि एक पवित्र हिंदू त्यौहार है जिसे हिंदू लोग मुख्य रूप से मनाते हैं इसे पूरे भारत में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। यह हमारे भक्ति का प्रतीक त्यौहार भी माना गया है। यह पर्व सभी जगह अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। चैत्र महा एवं आश्विन माह की नवरात्रि को मनाने के तरीके भी अलग-अलग है। चैत्र माह हिंदू कैलेंडर का प्रथम महीना कहलाता है। नवरात्रि के पीछे बहुत सी पौराणिक कहानियां प्रचलित हैं। नवरात्रि के 9 दिन बाद दसवे दिन दशहरा पर्व से भगवान राम की कथाएं भी प्रचलित है।

इस त्यौहार में देवियों के नौ स्वरूप की पूजा की जाती है। जिसमें से हर एक देवी का एक-एक दिन होता है और उनकी पूरी विधि अनुसार पूजा की जाती है।

नवरात्रि क्यों मनाई जाती है?

नवरात्रि मनाए जाने के पीछे दो धार्मिक मान्यताएं प्रचलित है। जिसमें से एक मान्यता के अनुसार महिषासुर नाम के एक राक्षस से जुड़ी हुई है जोकि ब्रह्मा जी का परम भक्त था। महिषासुर ने अपनी कठोर तपस्या से ब्रह्मा जी को प्रसन्न करके उन से वरदान मांगा कि कोई भी दानव, देव और पृथ्वी में रहने वाला कोई भी मनुष्य उसका वध ना कर सके। आसुरी प्रवृत्ति होने के कारण वरदान मिलते ही महिषासुर ने तीनों लोगों में अपना आतंक करना शुरू कर दिया , जिससे देव हो या मनुष्य सभी उसके आतंक से प्रताड़ित रहने लगे।

महिषासुर से परेशान होकर सभी देवी देवताओं और ब्रह्मा विष्णु महेश ने एक साथ मिलकर शक्ति स्वरूप जगत माता माता दुर्गा का मां शक्ति के रूप में दुर्गा मां को जन्म दिया।

मान्यता है कि माता दुर्गा और महिषासुर में 9 दिन तक युद्ध चला था। दसवीं दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का वध कर दिया। इसी कारण बुराई पर अच्छाई के जीत के रूप में 9 दिनों तक नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। जिसमें माता दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की अलग-अलग विधियों द्वारा पूजा की जाती है।

वहीं पर दूसरी मान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण को जीतने के लिए दुर्गा की उपासना 9 दिन तक की थी। इसी से प्रसन्न होकर माता दुर्गा ने भगवान श्रीराम को लंका जीतने का आशीर्वाद दिया था और भगवान श्रीराम ने 9 दिन तक रावण से युद्ध करने के बाद दसवे दिन उसका वध करके लंका को जीत लिया था।इसी कारण नवरात्रि को मनाने की परंपरा भी है।

नवरात्रि पूजन विधि

दोस्तों हम दो प्रमुख नवरात्रि जो चैत्र माह नवरात्रि और शरद माह नवरात्रि की पूजन विधियों के बारे में बताने जा रहे हैं जो निम्न है।

चैत्र मास की नवरात्रि की पूजन विधि

चैत्र मास की नवरात्रि के प्रथम दिन सर्वप्रथम स्नान करके जो बोए जाते हैं और माता रानी के नाम से 9 दिन तक व्रत रखा जाता है। नवरात्रि के दिनों में मांस एवं शराब के सेवन से बहुत ही परहेज किया जाता है। यह 9 दिन माता जी के शक्ति रूपों के नौ अलग-अलग दिन अलग-अलग रूपों की आराधना की जाती है। अष्टमी तथा नवमी को महा तिथि मानी जाती है। इन दिनों माता रानी की पूजन के पश्चात लोग कन्या भोज का भी आयोजन करते हैं। नवमी के दिन जो को किसी तालाब नदी में प्रवाहित कर देते हैं।

शरद माह के नवरात्रि की पूजन विधि

शरद मां की नवरात्रि की पूजन विधि भी चैत्र माह की नवरात्रि की पूजन विधि के अनुरूप ही है। इसमें भी 9 दिन तक उपवास रखा जाता है और माता रानी के नौ अलग-अलग स्वरूपों की अलग-अलग विधियों द्वारा पूजा की जाती है। कथा विधि विधान के साथ पूजन हवन का आयोजन किया जाता है तथा अष्टमी या नवमी को भंडारे का आयोजन भी किया जाता है। दसवें दिन अर्थात दशहरे के दिन मूर्ति को पवित्र नदी में विसर्जित कर दिया जाता है।

नवरात्रि कब मनाई जाती है ?

हिंदू कैलेंडर के अनुसार नवरात्रि का पर्व पौस, चैत्र, शरद एवं आषाढ़ माह में आता है लेकिन इसमें मुख्यता दो ही नवरात्रि प्रमुख रूप से मनाई जाती हैं। जिनमें से एक नवरात्रि चैत्र माह की नवरात्रि है तथा दूसरी नवरात्रि शरद मास की नवरात्रि।

नवरात्रि का महत्व

नवरात्रि हिंदू धर्म के अनुसार माता दुर्गा को प्रसन्न करने के बहुत ही अनुकूल दिन होते हैं। इन दिन माता दुर्गा के विधि विधान से पूजा करने पर हमें मनवांछित फल मिलता है। नवरात्रि के दौरान बहुत से लोग अपने घरों में एवं पंडालों में माता रानी की मूर्ति की स्थापना करते हैं तथा 9 दिन तक बहुत ही धूमधाम से एवं भव्य रूप से पूजन आयोजन करते हैं और फिर अपने श्रद्धा के अनुसार दसवे दिन नौवें दिन उन्हें पवित्र नदी में प्रवाहित कर देते हैं।

मूर्ति स्थापना के दौरान लोग बहुत ही धूमधाम से डीजे साउंड बाजा लगाकर हर्ष उल्लास के साथ नाच गाना करते हैं तथा 9 दिन माता रानी की अलग-अलग स्वरूपों की उपासना करते हैं। कहा जाता है कि नवरात्रि पौराणिक काल से ही चली आ रही है। भगवान राम ने लंका में विजय के पहले नवरात्रि के उपवास एवं पूजन कार्य किया था और माता सती के 9 अलग-अलग रूपों की आराधना की थी। पूजा के अलग-अलग मत माने जाते हैं।

निष्कर्ष

दोस्तों हमें उम्मीद है कि आपको नवरात्रि के बारे में जानकर बहुत ही प्रसन्नता हुई होगी। यह त्यौहार ही ऐसा है कि हम अपने आप को इस त्यौहार से दूर नहीं कर सकते। दोस्तों इस पोस्ट में जाना की नवरात्रि क्या होती है? नवरात्रि कब मनाते हैं तथा नवरात्रि का महत्व क्या होता है? अगर आप इसी प्रकार की अन्य जानकारियां पाना चाहते हैं तो हमारा आर्टिकल प्रतिदिन पढ़िए। अपना कीमती समय देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

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