शिवरात्रि क्यों मनाई जाती है ?
By: Date: October 11, 2020 Categories: Shivratri
शिवरात्रि क्यों मनाई जाती है ?

शिवरात्रि क्यों मनाई जाती है ? – नमस्कार दोस्तों कैसे हैं आप सभी उम्मीद है कि आप सभी स्वस्थ होंगे दोस्तों आज इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि शिवरात्रि क्या है । दोस्तों अगर आप जानना चाहते हैं कि शिवरात्रि क्या है और शिवरात्रि क्यों मनाई जाती है तो आज का हमारा आर्टिकल पूरा आखिरी तक पढ़िए ।

शिवरात्रि का पर्व पूरे भारत देश में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन भगवान शंकर की पूजा अर्चना की जाती है। दोस्तों आप यह तो जानते ही हैं कि भारत पूरे विश्व में संस्कृति के स्थान पर सबसे श्रेष्ठ स्थान पर हैं। भारत में कई प्रकार के त्यौहार होते हैं। दोस्तों शिवरात्रि एक हिंदू त्यौहार है जिसे पूरा देश मिलकर अलग-अलग रूपों में मनाता है।

पूरे देश में शिवरात्रि की बहुत ही महानता है। आज हम इस पोस्ट में इसी विषय पर चर्चा करने वाले हैं कि शिवरात्रि क्या होती है? तथा इसे कैसे मनाते हैं? शिवरात्रि में शंकर जी की पूजा क्यों करते हैं? तथा शंकर जी की पूजा करने के सही तरीके के बारे में बताएंगे।

शिवरात्रि क्या है?

शिवरात्रि एक ऐसा त्यौहार जिसमें देवों के देव महादेव शिव की आराधना की जाती है। यह त्यौहार शिव भक्तों के लिए बहुत खास होता है। इस त्यौहार को पूरा देश बहुत ही धूमधाम से मनाता है। दोस्तों आपको यह जानकर हैरानी होगी की शिवरात्रि को लेकर अपने देश में अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं।

दोस्तों इस दिन तमाम शिवभक्त अपने आस्था के प्रतीक भगवान शंकर के शिवलिंग में जल चढ़ा कर उनकी आराधना करते हैं तथा उपवास रहकर अपने मनवांछित फल की कामना करते हैं। उनका ऐसा मानना होता है कि भगवान शंकर उनकी सारी इच्छाएं पूरी करेंगे। इस दिन देशभर में अनेकों जगहें जागरण होते हैं तथा भगवान शंकर के मंदिर बहुत ही रंग बिरंगी लाइटों फूलों से सजाए जाते है। मंदिरों में इस दिन एक अनोखी भीड़ देखने को मिलती है। इस दिन मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहता है। लोग मंदिरों में बहुत ही ज्यादा संख्या में पहुंचते हैं।

दोस्तों वैसे तो देवों के देव महादेव शंकर भगवान की उपासना के लिए सप्ताह के सभी दिन ही अच्छे माने जाते हैं परंतु सोमवार को भगवान शंकर की आराधना का एक अलग विशेष प्रकार का महत्व है।

दोस्तों आपको यह जानकर हैरानी होगी कि हर महीने एक शिवरात्रि आती है। भारतीय कैलेंडर के अनुसार कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवरात्रि मानी जाती है। वही फाल्गुन माह में आने वाले कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि मनाई जाती है। इस दिन भक्त भगवान शंकर की उपासना करते हैं। अनेक जगह पर भव्य पूजा का आयोजन किया जाता है।

भगवान शंकर को महादेव क्यों कहा जाता है?

आप यह तो जानते ही होंगे कि भारतीय शास्त्रों के अनुसार कुछ देवी देवताओं को सर्वोपरि माना गया है जिसमें से ब्रह्मा विष्णु और महेश यानी भगवान शिव प्रमुख हैं। इन तीनों देवताओं को त्रिदेव भी कहा जाता है मगर दोस्तों इन तीनों देवताओं में भगवान शंकर ही ऐसे थे जो सबसे अलग थे। यह पृथ्वी में निवास करते थे। इनका नाम की वजह से इन्हें महादेव नहीं कहा जाता , भगवान शंकर को पूरे देश में कई नामों से जाना जाता है।

कहीं पर भगवान शिव को महाकाल तो कहीं पर बाबा भोले । कहीं पर बाबा बर्फानी तो कहीं पर नीलकंठ महादेव तो कहीं पर शिव को नटराज के नाम से पूजा जाता है। कई बहुत ही प्रसिद्ध मंदिर और तीर्थ हैं जिनका नाम भगवान शिव के ही नाम पर है ,उनमें से जैसे कि अमरनाथ कैलाशनाथ जैसे नाम भगवान शिव के नाम पर ही आधारित हैं। जहां पर लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते जाते रहते हैं।

भगवान शंकर भारतीय सभ्यता में सबसे बड़े देव माने जाते हैं इसीलिए इन्हें देवों के देव महादेव कहा जाता है। शिवरात्रि भगवान शिव का सबसे बड़ा त्यौहार माना जाता है। इसके बारे में बहुत सी अपनी अपनी अलग अलग विचारधारा हैं। देवों के देव महादेव पुकारे जाने के कारण ही इन्हें महादेव कहा जाता है।

शिवरात्रि क्यों मनाई जाती है?

शिवरात्रि को लेकर हमारे देश हैं कई कथाएं प्रचलित हैं। कहीं-कहीं पर फागुन मास कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को ही भगवान शंकर और पार्वती के शादी का दिन माना जाता है। कहीं-कहीं पर इस दिन भगवान शिव प्रदोष के समय दुनिया को अपने रूद्र अवतार में आकर अपनी तीसरी आंख खोलकर भस्म कर देते हैं तो कहीं कहीं पर यह मान्यता है कि फागुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को भगवान सूर्य और चंद्र देव अधिक नजदीक रहते हैं। इस दिन मान्यता है कि शीतल चंद्रमा और रूद्र शिव रूपी सूर्य का मिलन माना जाता है, इन्हीं सब कारणों के कारण इस चतुर्दशी को महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है।

कहीं कहीं पर यह मान्यता है कि भगवान शंकर का पहले केवल निराकार रूप ही था और इसी दिन वह निराकार से साकार रूप में आए थे। मान्यता के अनुसार भगवान शिव इस दिन अपने अनंत विशालकाय स्वरूप अग्नि लिंग में प्रकट हुए थे तो वहीं पर कुछ ग्रंथों के अनुसार इस दिन से ही दुनिया का निर्माण शुरू हुआ था। वहीं पर कुछ लोग का मानना है कि करोड़ों सूर्य के समान चमकने वाले तेजस्वी लिंग रूप में भगवान शंकर प्रकट हुए थे। इसीलिए फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि के रूप में मनाते हैं।

शिवरात्रि क्यों मनाते हैं?

शिव की रात्रि अर्थात भगवान शंकर भक्ति रात्रि इस दिन करोड़ों श्रद्धालु भगवान शंकर की पूजा करते हैं। यह दिन भगवान शंकर को प्रसन्न करने का सबसे उत्तम दिन माना गया है। इस दिन बहुत सी जगहों पर जागरण भजन कीर्तन का आयोजन किया जाता है और लोग प्रसाद के रूप मे भांग से बनी हुई ठंडाई आदि का सेवन करते हैं। भगवान शंकर को बुरी शक्तियों को नाश करने वाला माना गया है।

कुछ लोगों का मानना है कि इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से सारी नकारात्मक शक्तियां खत्म हो जाती हैं। वहीं पर कुछ लोग नशीले पदार्थ जैसे हुक्का शराब आदि का सेवन भी करते हैं। इस दिन शिवरात्रि को महीने का सबसे अंधेरा दिन माना जाता है। दोस्तों आप सब यह तो जानते ही होंगे कि भारत देश में महादेव के करोड़ों भक्त हैं और आज काल के युवा बच्चे तो भगवान शंकर यानी महादेव को बहुत ही मानते हैं।

महाशिवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व

आध्यात्मिक महत्व शिवरात्रि को एक अलग ही दिशा की ओर ले जाता है। भगवान शंकर को लोग जितना ही सांसारिक लोग मानते हैं वह उससे ज्यादा अधिक आध्यात्मिक जीवन पर चलने वाले लोग मानते हैं। भगवान शंकर को एक बहुत ही ज्ञानी पुरुष माना जाता था। योगिक परंपरा के अनुसार शिव कोई देव नहीं बल्कि एक आदि गुरु थे।

जिन्होंने सबसे पहले ज्ञान प्राप्त किया था और उस ज्ञान का प्रसारण किया जिस दिन उन्हें ज्ञान की चरम सीमा को छुआ और अपने मन को बिल्कुल शांत एवं स्थिर कर लिया, उसी दिन को शिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। वहीं पर कुछ लोगों का मानना है जैसे कि वैरागी लोग भगवान शंकर को एक वैरागी ही मानते थे जो हमेशा सांसारिक जीवन से दूर रहे हैं। बहुत से लोग का मानना होता है कि केवल शिव ही सत्य है बाकी सांसारिक इच्छाएं मोह माया है।

वैदिक परंपरा के अनुसार भगवान शंकर को एक महाबली ज्ञानी वैरागी देव माना गया है। भगवान शंकर की यह परंपरा शांति में विश्वास रखती है। इसी कारण महाशिवरात्रि का आध्यात्मिक रूप में एक बहुत ही खास स्थान है।

शिवरात्रि पर आधारित कथाएं।

शिवरात्रि एक पूरे भारत में मनाए जाने वाला बहुत ही बड़ा त्यौहार है। शिवरात्रि को लेकर अपने प्राचीन ग्रंथों में कई प्रकार की मान्यताएं प्रचलित हैं जैसे कि किसी किसी ग्रंथ में महाशिवरात्रि को भगवान शिव के जन्म के दिन मानी जाती है वही कई ग्रंथों में इस दिन को सर्वश्रेष्ठ स्वरूप अग्नि रिंग के सामने आए जाने वाले दिन के रूप में माना जाता है।

कहीं पर यह माना जाता है कि भगवान शिव के 64 ज्योतिर्लिंगों में से 12 ज्योतिर्लिंगों का ज्ञान इसी दिन हुआ था। कहते हैं कि भगवान शंकर का रूप अनंत तक है और वहीं पर किसी किसी शास्त्र में इस दिन को भगवान शिव के शादी का दिन का माना जाता है।

शिवरात्रि कब मनाई जाती है?

हिंदू कैलेंडर के अनुसार कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवरात्रि माना जाता है लेकिन फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि के रूप में माना जाता है। महाशिवरात्रि की दिनांक अंग्रेजी महीनों के हिसाब से हर साल बदलती रहती है। साल 2019 में महाशिवरात्रि का त्यौहार 4 मार्च को मनाया गया था और 2020 में 21 फरवरी को मनाया जाएगा।

शिवरात्रि की पूजन विधि

भारत के अनेकों जगहों पर शिवरात्रि की पूजा को लेकर अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित है। इसी कारण देश में शिवरात्रि कई तरीकों से मनाई जाती है। इस दिन शिव भक्त पवित्र जल से स्नान करके विभिन्न मंत्रों का जाप द्वारा भगवान शिव की विशेष पूजा का आयोजन करते हैं तथा शिवलिंग को जल वा दुग्ध से स्नान कराते हैं।

शिवरात्रि की संपूर्ण पूजा विधि के बारे में बात करें तो सबसे पहले पवित्र जल से स्नान करने के पश्चात भगवान शिव की शिवलिंग में सिंदूर लगाएं और फल चढ़ाएं। बाद में दूध मिठाइयों को चढ़ा कर पूजा करते हैं तथा इस दिन विशेष मंत्रों का उच्चारण द्वारा भगवान शंकर को प्रसन्न किया जाता है।

महाशिवरात्रि को जागृत की रात माना जाता है। शिवरात्रि की रात को भगवान शंकर पूजा एवं महा आरती का आयोजन किया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन रात को भगवान शिव कथा पार्वती की शादी हुई थी। इसी चित्रण को काल्पनिक रूप से दोबारा दोहराया जाता है तथा भगवान शिव की बहुत ही जोर शोर के साथ बारात निकाली जाती है।

निष्कर्ष

दोस्तों हमें उम्मीद है कि आप को इस लेख में प्रस्तुत जानकारियां बहुत ही पसंद आई होंगी। आपने इस लेख में जाना की शिवरात्रि क्या होती है तथा हम शिवरात्रि क्यों मनाते हैं तथा शिवरात्रि की पूजन विधि क्या होती है ? हमारे साथ अंत तक बने रहने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

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